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चाची ने भतीजे को

चाची ने भतीजे को, फिर वो दोनो एक दूसरे से किस करने में जुट गये, शंकर उसकी चुचियों को भी मसल रहा था, जिनमें अब पहले से ज़्यादा गुदाजपन आ गया था…! मेने फिर से कस कर अपनी आँखें मींच ली, उन्होने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला, मुझे कुच्छ राहत सी हुई, कि चलो जान बची, शायद इन्हें मेरे उपर दया आ गई होगी…

अपने घर आकर उसने अपने पति रामू को खाना वग़ैरह दिया और जल्दी ही ये कहकर अपने कमरे से निकल गयी कि, खाना खा कर वो अपने घर चला जाए, उसे सेठानी के पास देर हो जाएगी..! फिर जैसे ही वो उपर से धक्का मारता, रंगीली नीचे से अपनी कमर उचका देती जिससे शंकर के मजबूत कठोर जांघों के पाट उसकी गान्ड से टकराते और एक थपाक की आवाज़ कमरे में गूँज उठती…

झुकने से उसके गोल-गोल दूधिया उभर कुर्ते के चौड़े गले से काफ़ी अंदर तक अपनी भौगौलिक स्थिति को दर्शाने लगे…, चाची ने भतीजे को सोनल... ओह! क्या कर रहे हो भैया छोरो भैया मैं परिधि नहीं सोनल हू । आप तो बात करने के ही ख्याल उछल रहे है।

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  1. नतीजा…. झोंक-झोंक में सांड़ का सिर ज़मीन से जा टकराया, मौके का फ़ायदा उठाकर शंकर ने अपने दोनो हाथों को एक साथ जोड़कर कर मुक्का सा बनाया, और भड़ाक से उसके नथुनो पर दे मारा…!
  2. रंगीली – अरे बहू रानी, कमर और पीठ की हड्डी तो यहीं तक आती है ना, आप तो बस देखती जाओ मेरा कमाल, दर्द ऐसे छूमन्तर हो जाएगा, जैसे गधे के सिर से सींग…! हिंदी में ब्लू फिल्म बताएं
  3. सुन्दरी फूले हुए मुंह से बोली, इसमें भूत था इसलिए मैने ही तोड़ दिया. संतराम का दिमाग सनक गया. सुबह वो सुन्दरी से लड कर गया था. उसकी आग अभी ठंडी भी नही हुई थी कि ये नया ववाल और आ खड़ा हुआ. संतराम गुस्से से फुफकारता हुआ उठा और वही डंडा उठा लिया जिससे सुन्दरी ने सब तोड़ फोड़ दिया था. साथ में रूपये भी दिए. माला को राणाजी के इस व्यवहार ने बिदुषी बना दिया था. आज जो कुछ भी वो सोच रही थी वो उसके आज से पहले की सोच का हिस्सा नही
  4. चाची ने भतीजे को...हम किसी और बारे मे बात कर सकते है क्या?या नहीं आप सबको यही कंटीन्यू करनी है तो आ जाइए और मुझे कुछ लीजिए रंगीली ने लाला की बात मानकर उसे एक बार पूरा सुपाडा खोलकर देखा, फिर उसके पीहोल पर हल्के से अपनी जीभ लगाकर टेस्ट किया,
  5. हाफ बाजू कमीज़ से उसके मसल्स मानो फट पड़ने को तैयार थे, लेकिन मज़ाल क्या, लड़का एक इंच भी अपनी जगह से हिला हो…! लेकिन सुन्दरी का भी तो मन ये बात भूल गया था कि उसकी माँ ने उसे दोबारा बापिस न आने के लिए कहा था. भाई ने भी चिट्ठी लिख उसे वहां आने से इनकार किया था लेकिन सुन्दरी ने इन सब बातों को दरकिनार कर दिया. वो ये नही जानना चाहती थी कि वहां जाकर क्या खाएगी? कैसे उस अथाह गरीबी में जियेगी?

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कभी-कभी वो उसके गले से लटक जाती, शंकर उसको फूल की तरह हवा में उछाल देता, वो खिल-खिलाती हुई हवा में 10 फुट तक उपर चली जाती, और नीचे आते हुए उसे बड़ा मज़ा आता…!

सैनी।।।।।।। हयययय! शर्म तो आती है पर क्या करू तुझे देख कर चली जाती है। अब अंदर आओ गे की मैं पकड़ कर ले अऊ पागल लड़की, पता नहीं इसके दिमाग मैं क्या चलते रहता है। यही सोचते मैं चला अंदर। अन्दर हॉल मैं हम दोनो बैठे। ये कहकर वो दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगे, सुषमा अभी भी कुछ ना समझ पाने की स्थिति में पलंग के नीचे ही खड़ी थी…!

चाची ने भतीजे को,वो सब कुछ देर और बैठे कार्ड खेलते रहे, फिर गौरी को दूसरे दिन आने का प्रॉमिस करके दोनो भाई-बेहन अपनी माँ के पास चले गये…!

ना जाने वो कितनी देर और यौंही पड़े रहते कि तभी बाहर से मम्मी…मम्मी चिल्लाते हुए गौरी की आवाज़ सुनाई दी…

मेरी बात सुनते ही क्या एक्सप्रेशन था परिधि का जैसे सांप लोट रहे हो बदन में, जैसे कोई घायल शेर अपने शिकार को देख रहा हो।सेक्स बांग्ला वीडियो

लाला ने सेठानी के कहने पर बहू सुषमा को शहर के हॉस्पिटल ले जाकर उसका गर्भ चेक कराया, जिसकी रिपोर्ट के मुतविक बेटा ही आया…! उसके चेहरे पर अपने नये रूप को लेकर जो खुशी थी वो साफ-साफ दिखाई दे रही थी, वहीं प्रिया बीच-बीच में उसे ऐसी चाहत भरी नज़रों से देखती,

सुप्रिया ने मन ही मन कहा – तुम पर तो मैं ही मर मिटी हूँ शंकर, अपनी मन की आँखों से तो देखो, लेकिन प्रत्यक्ष में बोली - चलो ये सब छोड़ो, तुम मुझे गन्ना नही खिलाओगे..?

इतना कहने के बाद मेरे अल्फाज़ मेरे जुबान से बाहर ही नही निकल, मेरा दिल भर आया और आँखों से आँसू गिरने लगे मैंने फ़ोन कट कर दिया ।,चाची ने भतीजे को अभी शादी को 2 महीने भी नही बीते थे कि एक दिन लाला आ धम्के उसके घर, मुनीम ने लंबा चौड़ा वही-ख़ाता खोल कर उनके सामने रख दिया,

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